UP News: कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में भूखंडों की फर्जी रजिस्ट्री कराने वाले एक संगठित गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में केडीए कर्मचारी केशव मिश्रा को पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य साजिशकर्ता पाया गया है। आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूखंडों की रजिस्ट्री कराने में अहम भूमिका निभाई।
जांच के अनुसार, गिरोह उन पुराने आवासीय भूखंडों को निशाना बनाता था जिनकी रजिस्ट्री वर्षों से लंबित थी। आरोप है कि दलालों द्वारा उपलब्ध कराए गए फर्जी पहचान पत्र, जाली बैंक रसीद और अन्य कूटरचित दस्तावेजों को केशव मिश्रा अपने हस्ताक्षर से स्वीकृत कर आगे बढ़ाता था, जिससे फर्जी रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाती थी।
मामले का खुलासा पनकी स्थित एमआईजी भूखंड संख्या-3 की रजिस्ट्री के प्रयास के दौरान हुआ। जांच में पाया गया कि मूल आवंटी रमणी के स्थान पर किसी अन्य महिला की फोटो और फर्जी दस्तावेज लगाकर रजिस्ट्री कराने की कोशिश की जा रही थी। रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों को दस्तावेजों पर संदेह होने के बाद गहन जांच की गई, जिसमें पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।
केडीए उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के निर्देश पर स्वरूप नगर थाने में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों में केडीए कर्मचारी केशव मिश्रा, अरविंद गुप्ता, जितेंद्र, गवाह आनंद श्रीवास्तव, अभिषेक सचान और एक अज्ञात महिला शामिल हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, केडीए की आंतरिक जांच में इसी तरह की फर्जी रजिस्ट्री का एक और मामला सामने आया है, जिसमें भी केशव मिश्रा की संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं। प्राधिकरण इस मामले में भी वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।