रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड बोर्ड की ओर से एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें शत-प्रतिशत परीक्षाफल देने वाले विषयाध्यापकों को पहली बार सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम बोर्ड के सभागार में हुआ और इसे शिक्षकों के योगदान को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
इस समारोह में कुल 114 शिक्षकों का चयन किया गया था, जिनमें से 79 शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित होकर सम्मानित हुए। चयनित शिक्षकों में हाईस्कूल के 73 और इंटरमीडिएट के 41 विषयाध्यापक शामिल थे। यह सम्मान उन शिक्षकों को दिया गया जिन्होंने अपने विषय में विद्यार्थियों को शत-प्रतिशत सफलता दिलाई।
सम्मान पाने वाले शिक्षकों में सबसे अधिक संख्या ऊधमसिंहनगर जिले के शिक्षकों की रही। समारोह में प्रदेश के 13 जिलों से शिक्षक शामिल हुए और उन्हें कुमाऊं मंडल के अपर निदेशक गजेंद्र सिंह सौन, उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी और संयुक्त सचिव सीपी रतूड़ी ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दौरान सभी शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर, प्रमाण पत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों ने इस पहल को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि बोर्ड द्वारा किया गया यह प्रयास उन्हें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। कई शिक्षकों ने इसे अपने करियर का यादगार क्षण बताया।
उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी ने इस अवसर पर कहा कि बोर्ड के इतिहास में यह पहली बार है जब इस प्रकार का सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में कौशल एकेडमी कानिया का भी सहयोग रहा। यह पहल शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ाने और शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।
कौशल एकेडमी के निदेशक डॉ. गिरीश घुघत्याल ने इस मौके पर कहा कि शिक्षकों की भूमिका विद्यार्थियों के कौशल विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें भविष्य में भी इसी तरह योगदान देते रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया।
कार्यक्रम में उप सचिव सुषमा गौरव, शोध अधिकारी नंदन बिष्ट, एथलीट विजेंद्र चौधरी, अंशु चौहान, बचे सिंह रावत, मनमोहन सिंह और दरपान सिंह रौतेला सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। यह आयोजन शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।