उत्तराखंड की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मसूरी इन दिनों गंभीर सीवेज संकट से जूझ रही है। शहर के कई इलाकों में खुले नालों में बहता सीवेज स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। ताजा मामला मसूरी गेट क्षेत्र के पास सामने आया है, जहां कुछ होटल संचालकों पर आरोप है कि वे अपना सीवेज सीधे खुले नालों में छोड़ रहे हैं। यह गंदा पानी मुख्य सड़क से बहते हुए धोबी घाट स्थित जल स्रोत तक पहुंच रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी चिंता और आक्रोश है।
क्षेत्र में चरमराई सीवेज व्यवस्था
स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से सीवेज व्यवस्था चरमराई हुई है, लेकिन संबंधित विभाग इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा। खुले नालों में बहते गंदे पानी से पूरे इलाके में बदबू फैली रहती है। राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सड़क किनारे बहता सीवेज कई बार वाहनों के जरिए लोगों के कपड़ों तक पहुंच जाता है।
पेयजल स्रोत तक पहुंच रहा सीवेज का पानी
सबसे गंभीर चिंता इस बात को लेकर है कि यही दूषित पानी बहते हुए धोबी घाट स्थित मुख्य जल स्रोत तक पहुंच रहा है। इसी स्रोत से गढ़वाल जल संस्थान द्वारा मसूरी के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो दूषित पानी के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लोगों ने इंदौर की उस घटना का भी जिक्र किया, जहां दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए थे।
होटल संचालकों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और नगर निकाय से मांग की है कि खुले में सीवेज छोड़ने वाले होटल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही खराब सीवेज लाइनों की मरम्मत कर पूरी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।
इस मामले पर गढ़वाल जल संस्थान मसूरी के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरों और कर्मचारियों की टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया जाएगा। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की बात भी कही गई है।