उत्तराखंड में ज़ेप्टो और ब्लिंकिट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाइयों की डिलीवरी पर सख्ती या आंशिक रोक की खबर सामने आई है। यह कदम अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे दवाइयों के गलत इस्तेमाल, नियमों की अनदेखी और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर कारण बताए जा रहे हैं। राज्य प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि दवाइयां बिना सही डॉक्टर की सलाह और कानूनी प्रक्रिया के लोगों तक न पहुंचें।
ऑनलाइन मेडिकल सिस्टम पर सवाल
सरकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता यह है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कई बार मरीजों को बहुत जल्दी और बिना सही मेडिकल जांच के दवाइयां मिल जाती हैं। कुछ मामलों में सिर्फ मिनटों की टेली-कंसल्टेशन के आधार पर प्रिस्क्रिप्शन बन जाता है। इससे गलत दवा लेने और गलत इलाज का खतरा बढ़ जाता है, जो मरीज की सेहत के लिए गंभीर हो सकता है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर खतरा
एक बड़ा कारण एंटीबायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बिना जरूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक दवाएं ली जाती हैं, तो शरीर पर उनका असर धीरे-धीरे कम हो जाता है। इसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है, जो भारत में पहले से ही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। इसी वजह से सरकार ऐसे अनियंत्रित दवा वितरण पर नियंत्रण चाहती है।
प्रिस्क्रिप्शन नियमों पर सवाल
भारत में दवाइयों की बिक्री के लिए सख्त नियम बने हुए हैं, जैसे कि प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाइयां केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से ही दी जा सकती हैं। कई बार ऑनलाइन डिलीवरी मॉडल में इन नियमों के पालन को लेकर सवाल उठते हैं। खासकर शेड्यूल एच और एच1 दवाओं के मामले में सही वेरिफिकेशन न होने पर सरकार सख्त रुख अपना रही है।
ऑनलाइन दवा सिस्टम सवाल
ऑनलाइन सिस्टम में एक और बड़ी समस्या फर्जी या बार-बार इस्तेमाल होने वाले प्रिस्क्रिप्शन की भी है। इससे यह जोखिम बढ़ जाता है कि बिना सही मेडिकल सलाह के लोग मजबूत दवाइयां प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि सरकार इस पूरे सिस्टम को और ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है।
सरकार के सख्त नियम संभव
आने वाले समय में सरकार इन प्लेटफॉर्म्स पर और सख्त नियम लागू कर सकती है। इसमें डॉक्टर वेरिफिकेशन, फार्मेसी लाइसेंस की जांच और दवाइयों की ट्रैकिंग को और मजबूत किया जा सकता है। कंपनियों को भी अपने मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है ताकि फास्ट डिलीवरी के साथ सेफ डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।
उत्तराखंड में ज़ेप्टो और ब्लिंकिट की मेडिसिन डिलीवरी पर रोक या सख्ती का मुख्य उद्देश्य लोगों की सेहत की सुरक्षा है। सरकार का मानना है कि दवाइयों के मामले में तेजी से ज्यादा जरूरी सुरक्षित और सही इलाज है।