1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. शिक्षकों का प्रदर्शन, टीईटी अनिवार्यता और 2017 संशोधन के विरोध में सौंपा ज्ञापन

शिक्षकों का प्रदर्शन, टीईटी अनिवार्यता और 2017 संशोधन के विरोध में सौंपा ज्ञापन

बिजनौर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता और 2017 संशोधन के विरोध में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

By: hindidesk  RNI News Network
Updated:
gnews
शिक्षकों का प्रदर्शन, टीईटी अनिवार्यता और 2017 संशोधन के विरोध में सौंपा ज्ञापन

बिजनौर: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी जसजीत कौर को ज्ञापन सौंपते हुए 2017 के संशोधन और टीईटी अनिवार्यता से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शन के दौरान शिक्षक कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

टीईटी अनिवार्यता को लेकर जताई आपत्ति

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में एक संशोधन लागू किया गया था, जिसके तहत शिक्षकों के लिए दो वर्ष का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया था। यह प्रशिक्षण सेवा में रहते हुए पूरा किया जाना था।

उन्होंने कहा कि बाद में यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां निर्णय में यह कहा गया कि आरटीई अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा। महासंघ का कहना है कि इस फैसले और संबंधित संशोधन की व्याख्या को लेकर शिक्षकों में असंतोष है।

सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी फैसले का दिया हवाला

दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित उमा देवी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा का सिद्धांत न्यायिक व्यवस्था में पहले से स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि एक ओर वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण की बात होती है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से कार्यरत और प्रशिक्षित शिक्षकों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा होना चिंता का विषय है।

संशोधन के पैरा-2 में बदलाव की मांग

शिक्षकों ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से वर्ष 2017 के संशोधन के पैरा-2 की समीक्षा करने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि उक्त प्रावधान की भाषा को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार यह प्रावधान प्रशिक्षण की अनिवार्यता से संबंधित था, जबकि इसकी व्याख्या टीईटी अनिवार्यता से जोड़कर की जा रही है।

सरकार से पुनर्विचार की अपील

प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने केंद्र और राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर पुनर्विचार करने तथा शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन करने की मांग की। शिक्षकों का कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं और उनकी सेवा सुरक्षा एवं भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। फिलहाल शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंप दिया है और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें गूगल न्यूज़, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...