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राशन वितरण पर बवाल, ग्रामीणों ने कोटेदार पर लगाए घटतौली के आरोप

जालौन के रूरा सिरसा गांव में ग्रामीणों ने कोटेदार पर राशन वितरण में घटतौली और अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

By: hindidesk  RNI News Network
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राशन वितरण पर बवाल, ग्रामीणों ने कोटेदार पर लगाए घटतौली के आरोप

जालौन यूपी : माधौगढ़ तहसील क्षेत्र के रूरा सिरसा गांव में सरकारी राशन वितरण को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। ग्रामीणों ने गांव के कोटेदार पर राशन वितरण में अनियमितता और घटतौली के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि राशन कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रत्येक राशन कार्ड पर करीब दो किलो तक राशन कम दिया जा रहा है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में कई बार कोटेदार से शिकायत की गई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान न होने पर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराने का फैसला लिया।

मामले को गंभीर मानते हुए ग्राम प्रधान जानकी सिंह ने भी ग्रामीणों का समर्थन किया और राशन वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाए। इसके बाद गांव के दर्जनों ग्रामीण ग्राम प्रधान के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय को संबोधित एक शिकायत पत्र सौंपा।

शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने मांग की है कि राशन वितरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित कोटेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीबों के लिए जो खाद्यान्न भेज रही है, उसका पूरा लाभ पात्र लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राशन में लगातार की जा रही कथित कटौती से उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और जांच आवश्यक है।

जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के बाद प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया है। ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल गांव में राशन वितरण को लेकर चर्चा का माहौल है और सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आरोपों के संबंध में प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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