उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में अब शिक्षा के नाम पर किसी भी बच्चे के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का समय आ गया है, जहां ज्ञान, विज्ञान और संस्कार साथ चलें। उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रदेश के 230 मदरसे बंद कर दिए हैं और मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। अब केवल वही मदरसे संचालित होंगे, जिनमें राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम उन लोगों के लिए संदेश है जो उत्तराखंड को कट्टरता की ओर मोड़ना चाहते हैं। “हमारा लक्ष्य है कि शिक्षा के मंदिर बनें, न कि कट्टरता के अड्डे,” उन्होंने कहा। धामी सोमवार को कुमाऊं द्वार महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने बनभूलपुरा दंगे की याद दिलाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सख्त कानून बनाकर दंगों की राजनीति करने वालों को सबक सिखाया है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार की नीति साफ है “जो देश के कानून को मानता है वह हमारा है, और जो कानून तोड़ता है वह किसी का नहीं।” उन्होंने यह भी बताया कि इस बार की चारधाम यात्रा रिकॉर्ड तोड़ रही, अब तक 48 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले साल से दो लाख ज्यादा हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद करते हुए कहा कि आपदा के समय केंद्र सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की सहायता राशि तत्काल दी।
भूमि घोटालों पर सख्ती दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कई जमीनें सरकार में निहित कर दी हैं और भू-कानून को और मजबूत बनाया है। उन्होंने बताया कि धौलादेवी ब्लॉक में वायरल फीवर से हुई मौतों की जांच के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भेजी जा रही है।