उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ऐतिहासिक संबोधन से हुआ। यह राज्य विधानसभा के इतिहास में दूसरा अवसर रहा जब किसी राष्ट्रपति ने सदन को संबोधित किया। इससे पहले वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणव मुखर्जी ने विशेष सत्र में संबोधन दिया था। इस अवसर पर राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और सभी विधायक मौजूद रहे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि उत्तराखंड की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में नवंबर 2000 में जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर की गई थी। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों में उत्तराखंड ने पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने राज्य के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यहां की साक्षरता दर में वृद्धि हुई है और स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और सहभागिता में वृद्धि देखकर उन्हें गर्व होता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं ने राज्य का नाम रोशन किया है और उनकी गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की नियुक्ति को महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बताया और आशा व्यक्त की कि भविष्य में विधानसभा में महिलाओं की संख्या में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट की शौर्य परंपरा और युवाओं की देशभक्ति पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
राष्ट्रपति ने समान नागरिक संहिता विधेयक लागू करने के लिए उत्तराखंड विधानसभा की सराहना की और कहा कि अब तक 550 से अधिक विधेयक पारित किए जा चुके हैं, जिनमें लोकायुक्त, नकलरोधी और जमींदारी विनाश विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विधायक जनता और शासन के बीच की अहम कड़ी हैं, जिनकी जवाबदेही लोकतंत्र को सशक्त बनाती है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि राष्ट्रपति का देवभूमि आगमन राज्य के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को “भारत भूमि का ऑक्सीजन टावर” कहा जाता है, और यहां की महिलाएं प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव रखती हैं। उन्होंने राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की अभी भी कमी है, जिसे पूरा करने की दिशा में काम होना चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 25 वर्षों की विकास यात्रा राज्य के आत्मगौरव का प्रतीक है। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राष्ट्रपति के आशीर्वाद से उत्तराखंड को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में सरकार निरंतर काम कर रही है।
राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड ने पिछले 25 वर्षों में पर्यटन, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि इस सत्र में राज्य के विकास की दिशा तय करने के लिए रोडमैप पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समग्र विकास है, जहां प्रगति और प्रकृति दोनों साथ चलें। उन्होंने पहाड़ों से पलायन रोकने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और सुशासन को हर गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस प्रेरणादायी संबोधन ने राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा देने के साथ ही महिला सशक्तीकरण, सुशासन और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को और मजबूत किया।