उत्तराखंड में शीतकाल के आगमन के साथ ही उच्च हिमालयी मंदिरों के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के बाद अब तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए विधिवत रूप से बंद कर दिए गए।
बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की उपस्थिति में सुबह साढ़े दस बजे कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। भोग, यज्ञ और हवन पूजा के उपरांत भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप देकर मंदिर के कपाट बंद किए गए।
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह डोली प्रथम पड़ाव चोपता के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर 500 से अधिक श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भावपूर्ण विदाई दी। इस वर्ष लगभग डेढ़ लाख तीर्थयात्रियों ने भगवान तुंगनाथ के दर्शन किए।